सनातन वैदिक एवं भक्ति पुस्तकालय
दैनिक पूजा विधि५ मिनट

पूजा में दीपक जलाने का सही शास्त्र सम्मत विधान व दिशा

घी और तेल के दीपक में क्या अंतर है? दीपक की बत्ती की दिशा किस ओर होनी चाहिए और किस धातु का दीपक सर्वोत्तम है।

संपादकीय मंडल (शास्त्र संदर्भ: स्कंद पुराण)
मुख्य शास्त्र सम्मत निष्कर्ष:
  • घी का दीपक साधक के बाईं ओर और तेल का दीपक दाईं ओर रखें।
  • दीपक की लौ का मुख सदैव पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए।
  • दीपक से दूसरा दीपक कभी न जलाएं।
  • दीपक के नीचे थोड़े अक्षत (चावल) या फूल का आसन अवश्य दें।

दीपं ज्योति परं ब्रह्म दीपं ज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥ दीपक केवल प्रकाश का साधन नहीं, अपितु ज्ञान, सात्विकता और परमात्मा के तेज का साक्षात प्रतीक है।

शास्त्रों के अनुसार भगवान के दाहिने हाथ की ओर (साधक के बाईं ओर) शुद्ध देशी घी का दीपक और भगवान के बाएं हाथ की ओर (साधक के दाईं ओर) तिल या सरसों के तेल का दीपक स्थापित करना चाहिए।

घी के दीपक में खड़ी बत्ती (फूल बत्ती) तथा तेल के दीपक में लंबी बत्ती का प्रयोग उत्तम माना गया है। बत्ती का मुख सदा पूर्व (ज्ञान और आयु) अथवा उत्तर (धन और ऐश्वर्य) दिशा की ओर होना चाहिए। पश्चिम और दक्षिण दिशा की ओर दीपक का मुख कभी न रखें।

मिट्टी, पीतल, तांबा अथवा चांदी का दीपक शुभ होता है। कभी भी खंडित अथवा टूटे हुए दीपक का उपयोग पूजन में नहीं करना चाहिए।

प्रमाणित शास्त्र आधार

स्कंद पुराण · विष्णु धर्मोत्तर पुराण