सनातन वैदिक एवं भक्ति पुस्तकालय
प्रमाणिक वैदिक पुस्तकालय · शास्त्रसम्मत ग्रंथ · बहुलिपि पाठ

भक्ति से परम ज्ञान की ओरपवित्र स्तोत्र, चालीसा, महामंत्र एवं श्रीमद्भगवद्गीता

कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम, संस्कृत एवं अंग्रेज़ी लिपियों में तथा बहुभाषी अर्थ के साथ पावन श्लोकों का अध्ययन करें।

लोकप्रिय:
दैनिक श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता
गीता २.४७

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

— श्रीमद्भगवद्गीता (अध्याय २, श्लोक ४७)

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तुम कर्मों के फल के हेतु मत बनो और तुम्हारी अकर्मण्यता (कर्म न करने) में भी आसक्ति न हो।

प्रमाणित वैदिक स्रोत
नित्य साधना - दैनिक अभ्यास

नित्य साधना

चार चरण, क्रम से: दीप प्रज्वलन, श्वास को स्थिर करना, घण्टानाद, और अभिषेक। प्रतिदिन कुछ मिनट।

नित्य साधना: 0 दिन

दीपज्योति के समक्ष बैठकर श्लोक का पाठ करें।

Evening (Sandhya Vandanam) & Morning Pujaसक्रिय लिपि: संस्कृतम् (देवनागरी)

शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदः । शत्रुबुद्धि-विनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते ॥

पावन अर्थ (हिन्दी):

मैं उस मंगलकारी दीपक की ज्योति को प्रणाम करता हूँ, जो शुभ, कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा प्रदान करती है तथा मन के अज्ञान व दुर्भावों का नाश करती है।

पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके हाथ जोड़कर तीन बार पाठ करें।

आज का पावन भक्ति पाठ

शुक्रवार

देवता: माँ महालक्ष्मी / देवी जगदम्बा · दैनिक उपासना एवं साधना

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

पदच्छेद (शब्द-विच्छेद):

नमस्तेऽस्तु (आपको नमन) · महामाये (हे महामाया) · श्रीपीठे (श्रीपीठ पर स्थित) · सुरपूजिते (देवताओं द्वारा पूजित) · शङ्खचक्रगदाहस्ते (शंख चक्र गदा धारिणी) · महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते (महालक्ष्मी आपको नमन)

शब्दार्थ (अर्थ):

श्रीपीठ पर विराजमान, देवताओं द्वारा पूजित, शंख, चक्र और गदा को हाथों में धारण करने वाली महामाया भगवती महालक्ष्मी को मेरा बारंबार नमस्कार है।

आध्यात्मिक भावार्थ:माँ महालक्ष्मी केवल धन ही नहीं, अपितु आत्मिक शुद्धि, सद्विचार और दैवीय ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री हैं।
शुक्रवार को महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ करने से धन की शुद्धि, मंगलकार्यता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
नित्य पाठ हेतु पावन स्तोत्र व स्तुतियां

माँ महालक्ष्मी / देवी जगदम्बा · श्री महालक्ष्मी अष्टकम्

इष्ट देवता एवं सम्पूर्ण स्तोत्र संग्रह

इष्ट देवता एवं सम्पूर्ण स्तोत्र संग्रह

अपने इष्ट देव के स्तोत्र, चालीसा, मंत्र, आरती एवं साधना विधान पढ़ें।

🕉️सोमवार

भगवान शिव

महादेव, देवाधिदेव, नटराज, भोलेनाथ

ॐ नमः शिवाय
🙏मंगलवार एवं शनिवार

श्री हनुमान

पवनपुत्र, मारुतिनंदन, संकटमोचन, बजरंगबली

ॐ हं हनुमते नमः
🏹रविवार

श्री राम

रघुकुल नंदन, सियावर रामचन्द्र, कोदण्डधारी

श्री राम जय राम जय जय राम
🦚बुधवार

श्री कृष्ण

वासुदेव, योगेश्वर, द्वारकाधीश, मुरलीधर

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
☸️गुरुवार

भगवान विष्णु

नारायण, जगत्पति, पद्मनाभ, वैकुण्ठनाथ

ॐ विष्णवे नमः
🌺शुक्रवार / अष्टमी

माँ दुर्गा

आदिशक्ति, भवानी, महिषासुरमर्दिनी, सिंहवाहिनी

ॐ दुं दुर्गायै नमः / ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
🐘बुधवार

भगवान गणेश

विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य, गजानन, लम्बोदर

ॐ गं गणपतये नमः
🌸शुक्रवार

माँ लक्ष्मी

धनदा, पद्मा, कमला, श्री

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नमः
📖गुरुवार

माँ सरस्वती

वीणावादिनी, शारदा, वाग्देवी, हंसवाहिनी

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
नित्य पाठ हेतु पावन स्तोत्र व स्तुतियां

६ भारतीय लिपियों व भाषाओं में पदच्छेद व शब्दार्थ सहित उपलब्ध

5 मिनट पठन
श्री हनुमान चालीसा

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित ४० चौपाइयों का अत्यंत सिद्ध व प्रभावशाली स्तोत्र।

मूल शास्त्र संदर्भ: रामभक्ति साहित्य (गोस्वामी तुलसीदास विरचित)
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2स्तोत्र
7 मिनट पठन
शिव ताण्डव स्तोत्रम्

लंकारेश रावण द्वारा रचित भगवान शिव का परम ओजस्वी, पंचचामर छन्द में निबद्ध स्तुति-स्तोत्र।

मूल शास्त्र संदर्भ: शिव पुराण / रामायण परंपरा
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3 मिनट पठन
महामृत्युंजय मंत्र

ऋग्वेद एवं यजुर्वेद का सर्वोच्च मोक्ष एवं आरोग्य प्रदायक संजीवनी महामंत्र।

मूल शास्त्र संदर्भ: ऋग्वेद (७.५९.१२) / शुक्ल यजुर्वेद (३.६०)
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4स्तोत्र
8 मिनट पठन
श्री राम रक्षा स्तोत्रम्

ऋषि बुधकौशिक द्वारा रचित भगवान श्री राम का अभेद्य कवच और रक्षा स्तोत्र।

मूल शास्त्र संदर्भ: पद्म पुराण परंपरा (ऋषि बुधकौशिक विरचित)
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4 मिनट पठन
श्री महालक्ष्मी अष्टकम्

देवराज इंद्र द्वारा रचित श्री महालक्ष्मी की आठ श्लोकों की पावन स्तुति जो धन, धान्य और सुख-समृद्धि प्रदान करती है।

मूल शास्त्र संदर्भ: पद्म पुराण (इंद्र कृत)
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6स्तोत्र
3 मिनट पठन
श्री संकटनाशन गणेश स्तोत्रम्

देवर्षि नारद द्वारा रचित श्री गणेश जी के बारह दिव्य नामों का संकटमोचन स्तोत्र।

मूल शास्त्र संदर्भ: नारद पुराण
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7मंत्र
3 मिनट पठन
गायत्री महामंत्र

वेद्माता गायत्री का सर्वोत्कृष्ट सविता (सूर्य) ध्यान महामंत्र, जो बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करता है।

मूल शास्त्र संदर्भ: ऋग्वेद (३.६२.१०) / यजुर्वेद
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4 मिनट पठन
श्री शिव जी की आरती (जय शिव ओंकारा)

भगवान भोलेनाथ की नित्य सायंकाल गाई जाने वाली पारंपरिक एवं प्रसिद्ध आरती।

मूल शास्त्र संदर्भ: पारंपरिक आरती संग्रह
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9स्तोत्र
4 मिनट पठन
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मूल शास्त्र संदर्भ: Devanagari source scripture here
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10चालीसा
5 मिनट पठन
श्री गणेश चालीसा

A forty-verse Hindi devotional hymn to Lord Ganesha, the remover of obstacles and lord of beginnings. It recounts his birth, his form and his deeds, and closes with the promise that regular recitation clears difficulties and grants wisdom. Traditionally read on Sankashti Chaturthi, on Wednesdays, and before starting anything new.

मूल शास्त्र संदर्भ:
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कुरुक्षेत्र पावन संवाद · ७०० श्लोक

श्रीमद्भगवद्गीता

ज्ञान, भक्ति और कर्मयोग का दिव्य समन्वय
Chapter 2, Verse 47निष्काम कर्मयोग का शाश्वत सिद्धांत

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

श्लोकार्थ (हिन्दी):

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तुम कर्मों के फल के हेतु मत बनो और तुम्हारी अकर्मण्यता (कर्म न करने) में भी आसक्ति न हो।

गूढ़ भावार्थ एवं तत्व:

Focus entirely on righteous effort and duty in the present moment without being agitated by outcomes or expectations.

श्रीमद्भगवद्गीता — सम्पूर्ण १८ अध्याय

किसी भी अध्याय का बहुलिपि व अर्थ सहित अध्ययन करें
अध्याय 147 कुल श्लोक/पद

अध्याय १ — अर्जुन विषाद योग

अर्जुनविषादयोग

कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में दोनों सेनाओं के बीच स्थित होकर अर्जुन अपने बंधु-बांधवों, गुरुओं और संबंधियों को देखकर मोह और शोक से ग्रस्त हो जाते हैं और धनुष-बाण त्यागकर बैठ जाते हैं।

कुरुक्षेत्र युद्धभूमिमोहमग्न अर्जुन
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अध्याय 272 कुल श्लोक/पद

अध्याय २ — सांख्य योग

साङ्ख्ययोग

भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को आत्मा की अमरता, सुख-दुःख में समता और फल की इच्छा के बिना केवल कर्तव्य कर्म करने का उपदेश देते हैं तथा स्थितप्रज्ञ पुरुष के लक्षण बताते हैं।

आत्मा की अमरतानिष्काम कर्मयोग
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अध्याय 343 कुल श्लोक/पद

अध्याय ३ — कर्म योग

कर्मयोग

कर्म त्यागने से संन्यास नहीं मिलता, अपितु समाज कल्याण और लोकसंग्रह के लिए कर्तव्य कर्म करना अनिवार्य है। काम और क्रोध को ज्ञान रूपी अग्नि से वश में करने का संदेश।

यज्ञार्थ कर्मलोकसंग्रह
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अध्याय 442 कुल श्लोक/पद

अध्याय ४ — ज्ञान कर्म संन्यास योग

ज्ञानकर्मसंन्यासयोग

धर्म की स्थापना हेतु भगवान के अवतार का रहस्य, कर्म में अकर्म की दृष्टि और ज्ञान रूपी नौका से संसार-सागर पार करने की विधि।

ईश्वर का अवतारज्ञान-यज्ञ
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अध्याय 647 कुल श्लोक/पद

अध्याय ६ — आत्मसंयम योग

आत्मसंयमयोग

ध्यान का आसन, मन को एकाग्र करने की साधना, और चंचल मन को अभ्यास व वैराग्य द्वारा वश में करने की विधि।

ध्यान विधिमन का निग्रह
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अध्याय 934 कुल श्लोक/पद

अध्याय ९ — राजविद्या राजगुह्य योग

राजविद्याराजगुह्ययोग

परम ज्ञान और परम रहस्य का प्रतिपादन, ईश्वर की सर्वव्यापकता और अनन्य भक्तों के संरक्षण का दिव्य वचन।

अनन्य भक्तियोगक्षेम
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अध्याय 1220 कुल श्लोक/पद

अध्याय १२ — भक्ति योग

भक्तियोग

सगुण-साकार और निर्गुण-निराकार उपासना का विवेचन, तथा उन आंतरिक गुणों का वर्णन जिनसे कोई साधक भगवान का अत्यंत प्रिय बनता है।

सगुण व निर्गुण उपासनाभक्त के लक्षण
सम्पूर्ण पाठ पढ़ें
अध्याय 1878 कुल श्लोक/पद

अध्याय १८ — मोक्ष संन्यास योग

मोक्षसंन्यासयोग

संपूर्ण गीता का सार—त्याग का वास्तविक स्वरूप, सात्विक कर्म और बुद्धि, तथा भगवान के चरणों में पूर्ण शरणागति का अंतिम महावाक्य।

त्याग और संन्यासत्रिविध श्रद्धा व कर्म
सम्पूर्ण पाठ पढ़ें
सनातन व्रत, पर्व एवं तिथियां

पर्व एवं त्योहार मार्गदर्शिका

शास्त्र सम्मत पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत कथा एवं संबंधित स्तोत्र-मंत्र

महाशिवरात्रि
फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष चतुर्दशी
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महाशिवरात्रि

Maha Shivaratri

देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती के पावन विवाह तथा ज्योतिर्लिंग प्राकट्य का महारात्रि महापर्व।

प्रमुख पूजन विधि:

प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें और शुद्ध वस्त्र धारण करें।

संपूर्ण पूजन विधि व कथा3 मंत्र
शारदीय / चैत्र नवरात्रि
आश्विन / चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी
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शारदीय / चैत्र नवरात्रि

Navaratri (Nine Sacred Nights)

आदिशक्ति माता जगदम्बा के नौ दिव्य स्वरूपों (नवदुर्गा) की उपासना का नौ दिवसीय पावन महापर्व।

प्रमुख पूजन विधि:

प्रतिपदा तिथि को शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) और अखंड ज्योति प्रज्वलित करें।

संपूर्ण पूजन विधि व कथा3 मंत्र
श्री कृष्ण जन्माष्टमी
भाद्रपद मास, कृष्ण पक्ष अष्टमी (रोहिणी नक्षत्र)
🦚

श्री कृष्ण जन्माष्टमी

Krishna Janmashtami

मथुरा के कारागार में पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण के अवतरण का आनंदमय महापर्व।

प्रमुख पूजन विधि:

दिनभर उपवास रखें और भगवान के बाल स्वरूप (लड्डू गोपाल) का सुंदर श्रृंगार करें।

संपूर्ण पूजन विधि व कथा3 मंत्र
श्री राम नवमी
चैत्र मास, शुक्ल पक्ष नवमी (मध्याह्न)
🏹

श्री राम नवमी

Rama Navami

अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी के प्राकट्य का परम पावन दिवस।

प्रमुख पूजन विधि:

मध्याह्न १२ बजे "भए प्रगट कृपाला दीनदयाला" गाते हुए श्री राम जन्मोत्सव मनाएं।

संपूर्ण पूजन विधि व कथा3 मंत्र
दीपावली (महालक्ष्मी पूजन)
कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अमावस्या (प्रदोष काल)
🪔

दीपावली (महालक्ष्मी पूजन)

Deepawali (Diwali)

प्रकाश, समृद्धि और माता महालक्ष्मी व भगवान श्री गणेश के पूजन का महापर्व।

प्रमुख पूजन विधि:

प्रदोष काल अथवा स्थिर लग्न (वृषभ/सिंह) में महालक्ष्मी-गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।

संपूर्ण पूजन विधि व कथा3 मंत्र
सनातन मीमांसा एवं शास्त्र सम्मत विचार

सनातन भक्ति ज्ञान एवं साधना विमर्श

दैनिक पूजा नियम, षोडशोपचार, ध्यान पद्धतियां एवं वेदांत सिद्धांत

साधना एवं जप विधि
६ मिनट

माला जप के शास्त्रसम्मत नियम एवं १०८ मनकों का वैज्ञानिक रहस्य

जप करते समय माला को कैसे पकड़ें, सुमेरु का उल्लंघन क्यों न करें, और १०८ मनकों की आध्यात्मिक व खगोलीय गणना क्या है।

संदर्भ: अग्नि पुराण (अध्याय २१४), लिंग पुराण, मंत्र महोदधि
संपूर्ण आलेख पढ़ें
दैनिक पूजा विधि
५ मिनट

पूजा में दीपक जलाने का सही शास्त्र सम्मत विधान व दिशा

घी और तेल के दीपक में क्या अंतर है? दीपक की बत्ती की दिशा किस ओर होनी चाहिए और किस धातु का दीपक सर्वोत्तम है।

संदर्भ: स्कंद पुराण, विष्णु धर्मोत्तर पुराण
संपूर्ण आलेख पढ़ें
वेदांत एवं दर्शन
७ मिनट

श्रीमद्भगवद्गीता के पांच आधारभूत स्तम्भ (ईश्वर, जीव, प्रकृति, काल व कर्म)

संपूर्ण ७०० श्लोकों का तात्विक सार—ईश्वर, जीवात्मा, प्रकृति, काल और कर्म के अंतर्संबंध का दार्शनिक विश्लेषण।

संदर्भ: श्रीमद्भगवद्गीता, ईशावास्योपनिषद्
संपूर्ण आलेख पढ़ें