सनातन वैदिक एवं भक्ति पुस्तकालय
मंत्र🕉️भगवान शिव3 मिनट

महामृत्युंजय मंत्र

ऋग्वेद एवं यजुर्वेद का सर्वोच्च मोक्ष एवं आरोग्य प्रदायक संजीवनी महामंत्र।

मूल शास्त्र संदर्भ: ऋग्वेद (७.५९.१२) / शुक्ल यजुर्वेद (३.६०)
पारंपरिक रचयिता: ऋषि मार्कण्डेय / ऋषि वसिष्ठ
लिपि (Script):
अर्थ भाषा (Meaning):
1mantra

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

पदच्छेद (शब्द-विच्छेद) (Hindi):
त्र्यम्बकम्: त्रिनेत्रधारी भगवान शिव को
यजामहे: हम पूजते हैं / नमन करते हैं
सुगन्धिम्: दिव्य सुगंध एवं सद्गुणों से युक्त
पुष्टि-वर्धनम्: जीवन शक्ति, पोषण एवं सामर्थ्य बढ़ाने वाले
उर्वारुकम् इव: पके हुए खरबूजे या ककड़ी की भांति
बन्धनात्: डंठल / सांसारिक बंधनों से
मृत्योः: मृत्यु एवं नश्वरता से
मुक्षीय: मुक्त करें
मा अमृतात्: परन्तु अमृतत्व (मोक्ष) से कभी विलग न करें

शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):हम त्रिनेत्रधारी, सुगंधित और समस्त सृष्टि का पोषण एवं संवर्धन करने वाले भगवान शिव की आराधना करते हैं। जिस प्रकार पका हुआ खरबूजा बिना किसी कष्ट के अपनी बेल (डंठल) के बंधन से स्वतः अलग हो जाता है, उसी प्रकार हम भी मृत्यु और नश्वर संसार के बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष (अमृतत्व) को प्राप्त हों, अमरता से कभी वंचित न हों।

गूढ़ भावार्थ एवं तत्व:यह मंत्र केवल भौतिक मृत्यु से रक्षा नहीं करता, अपितु अज्ञान, वासना और अहंकार की आध्यात्मिक मृत्यु से पार ले जाकर परमानंद स्वरूप परमात्मा से एकाकार कराता है।

फलश्रुति एवं महात्म्य & पूजा विधि एवं शास्त्र सम्मत नियम

फलश्रुति एवं महात्म्य (Hindi):

अकाल मृत्यु हरणं सर्व व्याधि विनाशनम्। इस मंत्र के नियमित जप से असाध्य रोगों, अकाल मृत्यु के भय और सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिलकर अमृतत्व (मोक्ष) की प्राप्ति होती है।

पूजा विधि एवं शास्त्र सम्मत नियम (Hindi):

ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्याकाल में रुद्राक्ष की माला से १०८ बार पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके ध्यानमग्न होकर जप करें।

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