श्री शिव जी की आरती (जय शिव ओंकारा)
भगवान भोलेनाथ की नित्य सायंकाल गाई जाने वाली पारंपरिक एवं प्रसिद्ध आरती।
जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):हे ओंकार स्वरूप सदाशिव! आपकी जय हो। आप ही ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव के मूल रूप हैं और शक्ति को अपने अर्द्धांग में धारण करने वाले हैं।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):आप ही एक मुख, चार मुख (ब्रह्मा) और पंचमुख स्वरूप में सुशोभित हैं। हंस, गरुड़ और नंदी (वृषभ) आपके वाहन के रूप में सुशोभित हैं।
दो भुज चार चतुर्भुज दसमुख अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):दो भुजाओं, चार भुजाओं और दस भुजाओं से युक्त आपका यह त्रिगुण रूप देखकर तीनों लोकों के प्राणी मुग्ध हो जाते हैं।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी। त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):आप रुद्राक्ष की अक्षमाला, वनमाला और मुंडमाला धारण करने वाले हैं। आप ही त्रिपुरासुर और कंस का संहार करने वाले परमेश्वर हैं।
फलश्रुति एवं महात्म्य & पूजा विधि एवं शास्त्र सम्मत नियम
सायंकाल अथवा पूजा के समय भगवान शिव की यह आरती गाने से घर में सुख-शांति आती है, समस्त कष्ट दूर होते हैं और भगवान सदाशिव की कृपा प्राप्त होती है।
कपूर अथवा पंचमुखी घी के दीपक से आरती करें, साथ में घंटी बजाते हुए श्रद्धापूर्वक गाएं।