श्री राम रक्षा स्तोत्रम्
ऋषि बुधकौशिक द्वारा रचित भगवान श्री राम का अभेद्य कवच और रक्षा स्तोत्र।
चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्। एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्॥१॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):श्री रघुनाथ जी का पावन चरित्र सौ करोड़ श्लोकों में विस्तृत है। उसका एक-एक अक्षर भी मनुष्यों के बड़े से बड़े पापों और विकारों का नाश करने में समर्थ है।
ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् । जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम् ॥ २ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):नीलकमल के समान श्यामवर्ण और कमल के समान नेत्रों वाले श्रीराम का ध्यान करना चाहिए। उनके साथ जानकी और लक्ष्मण हैं तथा वे जटामुकुट से सुशोभित हैं।
सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तञ्चरान्तकम् । स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ॥ ३ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):तलवार, तरकश, धनुष और बाण धारण किए हुए तथा रात्रि में विचरण करने वाले राक्षसों का संहार करने वाले श्रीराम का ध्यान करना चाहिए। जन्मरहित और सर्वव्यापी परमात्मा ने अपनी दिव्य लीला से जगत की रक्षा के लिए अवतार लिया।
रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम् । शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥ ४ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):बुद्धिमान व्यक्ति पापों का नाश करने वाली और शुभ कामनाओं को पूर्ण करने वाली इस रामरक्षा का पाठ करे। राघव श्रीराम मेरे सिर की रक्षा करें और दशरथ के पुत्र मेरे ललाट की रक्षा करें।
कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुती । घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥ ५ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):कौसल्या के पुत्र श्रीराम मेरे नेत्रों की रक्षा करें। विश्वामित्र के प्रिय श्रीराम मेरे कानों की रक्षा करें। यज्ञ की रक्षा करने वाले श्रीराम मेरी नासिका की रक्षा करें। लक्ष्मण से अत्यन्त प्रेम करने वाले श्रीराम मेरे मुख की रक्षा करें।
जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः । स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ॥ ६ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):ज्ञान के भंडार श्रीराम मेरी जिह्वा की रक्षा करें। भरत द्वारा वन्दित श्रीराम मेरे कंठ की रक्षा करें। दिव्य अस्त्र-शस्त्र धारण करने वाले राम मेरे कंधों की रक्षा करें। भगवान शिव के धनुष को तोड़ने वाले राम मेरी भुजाओं की रक्षा करें।
करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित् । मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ॥ ७ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):सीता के पति श्रीराम मेरे हाथों की रक्षा करें। परशुराम को पराजित करने वाले राम मेरे हृदय की रक्षा करें। खर का वध करने वाले राम मेरे मध्य भाग की रक्षा करें। जाम्बवान के आश्रय रहे श्रीराम मेरी नाभि की रक्षा करें।
सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः । ऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत् ॥ ८ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):सुग्रीव के स्वामी श्रीराम मेरी कमर की रक्षा करें। हनुमान के प्रभु श्रीराम मेरे कटि एवं जंघा-प्रदेश की रक्षा करें। रघुवंश के श्रेष्ठ और राक्षसकुल का विनाश करने वाले राम मेरी जंघाओं की रक्षा करें।
जानुनी सेतुकृत्पातु जङ्घे दशमुखान्तकः । पादौ बिभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः ॥ ९ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):लंका तक सेतु बनाने वाले श्रीराम मेरे घुटनों की रक्षा करें। दस सिर वाले रावण का अंत करने वाले राम मेरी पिंडलियों की रक्षा करें। विभीषण को राज्य और ऐश्वर्य देने वाले राम मेरे पैरों की रक्षा करें। श्रीराम मेरे सम्पूर्ण शरीर की रक्षा करें।
एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत् । स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ॥ १० ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):श्रीराम की शक्ति से युक्त इस रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करने वाला पुण्यात्मा मनुष्य दीर्घायु, सुखी, संतानवान, विजयी और विनयी होता है।
पातालभूतलव्योमचारिणश्छद्मचारिणः । न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ॥ ११ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):पाताल, पृथ्वी और आकाश में विचरण करने वाले तथा छद्म रूप में घूमने वाले दुष्ट प्राणी भी रामनाम से सुरक्षित व्यक्ति को देख तक नहीं सकते।
रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन् । नरो न लिप्यते पापैः भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥ १२ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):जो मनुष्य “राम”, “रामभद्र” या “रामचन्द्र” नाम का स्मरण करता है, वह पापों से लिप्त नहीं होता और सांसारिक सुख तथा मोक्ष दोनों प्राप्त करता है।
जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम् । यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥ १३ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):जगत् को विजय प्रदान करने वाले रामनाम रूपी एकमात्र मन्त्र से सुरक्षित इस रामरक्षा को कंठ में धारण करने वाले व्यक्ति को सभी सिद्धियाँ सहज ही प्राप्त होती हैं।
वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत् । अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम् ॥ १४ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):“वज्रपंजर” नामक इस रामकवच का स्मरण करने वाले व्यक्ति के कार्यों में बाधाएँ नहीं आतीं और वह हर स्थान पर विजय तथा मंगल प्राप्त करता है।
आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः । तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ॥ १५ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):भगवान शिव ने स्वप्न में बुधकौशिक ऋषि को इस रामरक्षा स्तोत्र की रचना करने का आदेश दिया। प्रातः जागने पर ऋषि ने शिव की आज्ञा के अनुसार इसे लिख दिया।
आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम् । अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान् स नः प्रभुः ॥ १६ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):जो कल्पवृक्षों को भी आनन्द देने वाले हैं, सभी आपदाओं का अंत करने वाले हैं और तीनों लोकों को प्रिय हैं, वे श्रीमान् श्रीराम हमारे प्रभु हों।
तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ । पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥ १७ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):युवा, सुन्दर और कोमल होते हुए भी अत्यन्त शक्तिशाली राम और लक्ष्मण कमल के समान विशाल नेत्रों वाले हैं। वे वल्कल वस्त्र और कृष्णमृगचर्म धारण किए हुए हैं।
फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ । पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥ १८ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):दशरथ के पुत्र और भाई राम-लक्ष्मण फल-मूल का आहार करते हुए, इन्द्रियों को वश में रखकर तपस्वी और ब्रह्मचारी के समान जीवन व्यतीत करते थे।
शरण्यौ सर्वसत्त्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम् । रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ॥ १९ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):सभी प्राणियों के शरणदाता, सभी धनुर्धरों में श्रेष्ठ तथा राक्षसकुल का नाश करने वाले रघुवंश के श्रेष्ठ राम और लक्ष्मण हमारी रक्षा करें।
आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशावक्षयाशुगनिषङ्गसङ्गिनौ । रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम् ॥ २० ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):तैयार धनुष, बाण और अक्षय तरकश धारण किए हुए श्रीराम और लक्ष्मण मेरी रक्षा के लिए सदैव मेरे मार्ग में मेरे आगे चलते रहें।
सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा । गच्छन्मनोरथोऽस्माकं रामः पातु सलक्ष्मणः ॥ २१ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):कवच धारण किए, तलवार, धनुष और बाण से सुसज्जित युवा श्रीराम लक्ष्मण के साथ हमारे मनोवांछित शुभ कार्यों को पूर्ण करते हुए हमारी रक्षा करें।
रामो दाशरथिः शूरो लक्ष्मणानुचरो बली । काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ॥ २२ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):श्रीराम दशरथ के पुत्र, वीर और बलशाली हैं तथा लक्ष्मण उनके साथ रहते हैं। वे काकुत्स्थ वंश के, पूर्ण पुरुष, कौसल्या के पुत्र और रघुवंश के श्रेष्ठ हैं।
वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः । जानकीवल्लभः श्रीमान् अप्रमेय पराक्रमः ॥ २३ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):श्रीराम वेदान्त द्वारा जाने जाने वाले, यज्ञों के स्वामी और सनातन पुरुषोत्तम हैं। वे जानकी के प्रिय, श्रीसम्पन्न और असीम पराक्रम वाले हैं।
इत्येतानि जपन्नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः । अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ॥ २४ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):जो मेरा भक्त श्रद्धा से प्रतिदिन इन नामों का जप करता है, वह अश्वमेध यज्ञ से भी अधिक पुण्य प्राप्त करता है। इसमें कोई संदेह नहीं है।
रामं दूर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम् । स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैः न ते संसारिणो नराः ॥ २५ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):जो मनुष्य दुर्वादल के समान श्यामवर्ण, कमलनयन और पीताम्बरधारी श्रीराम की दिव्य नामों से स्तुति करते हैं, वे केवल सांसारिक बंधन में पड़े हुए मनुष्य नहीं रहते; उन्हें भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरम् । काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम् । राजेन्द्रं सत्यसन्धं दशरथतनयं श्यामलं शान्तमूर्तिम् । वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम् ॥ २६ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):मैं लक्ष्मण के बड़े भाई, रघुवंश के श्रेष्ठ, सीता के पति और सुन्दर श्रीराम को प्रणाम करता हूँ। करुणा के सागर, गुणों के भंडार, ब्राह्मणों के प्रिय और धर्मनिष्ठ राम को प्रणाम करता हूँ। सत्यव्रती, दशरथ के पुत्र, श्यामवर्ण, शांतस्वरूप, लोक को आनन्द देने वाले, रघुकुल के तिलक और रावण के शत्रु राघव को मैं प्रणाम करता हूँ।
रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे । रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥ २७ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):श्रीराम, रामभद्र, रामचन्द्र, परम दिव्य स्वरूप, रघुनाथ, सबके नाथ और सीता के पति श्रीराम को प्रणाम है।
श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम श्रीराम राम भरताग्रज राम राम । श्रीराम राम रणकर्कश राम राम श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥ २८ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):हे रघुवंश को आनन्द देने वाले श्रीराम! हे भरत के बड़े भाई! हे युद्ध में महान पराक्रमी राम! हे श्रीराम, आप ही मेरे शरणदाता बनें।
श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि । श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥ २९ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):मैं श्रीरामचन्द्र के चरणों का मन से स्मरण करता हूँ, वाणी से स्तुति करता हूँ, सिर से प्रणाम करता हूँ और उन्हीं पवित्र चरणों में पूर्ण शरण ग्रहण करता हूँ।
माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः । सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु- र्नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥ ३० ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):राम ही मेरी माता हैं, रामचन्द्र ही मेरे पिता हैं। राम ही मेरे स्वामी हैं और रामचन्द्र ही मेरे मित्र हैं। दयालु रामचन्द्र ही मेरा सर्वस्व हैं। उनके अतिरिक्त मैं किसी अन्य को नहीं जानता।
दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा । पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥ ३१ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):जिनके दाहिने लक्ष्मण, बाएँ जनकनन्दिनी सीता और सामने हनुमान विराजमान हैं, उन रघुनन्दन श्रीराम को मैं प्रणाम करता हूँ।
लोकाभिरामं रणरङ्गधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम् । कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रम् शरणं प्रपद्ये ॥ ३२ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):जो सम्पूर्ण संसार को आनन्द देने वाले, रणभूमि में वीर, कमलनयन, रघुवंश के नाथ तथा करुणा के स्वरूप और करुणा के सागर हैं, उन श्रीरामचन्द्र की मैं शरण ग्रहण करता हूँ।
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥ ३३ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):जो मन के समान तीव्र गति वाले, वायु के समान वेगवान, जितेन्द्रिय, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, वायुपुत्र, वानरसेना के प्रमुख और श्रीराम के दूत हैं, उन हनुमानजी की मैं शरण ग्रहण करता हूँ।
कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम् । आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम् ॥ ३४ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):काव्य रूपी शाखा पर बैठकर “राम राम” के मधुर अक्षरों का गान करने वाले कोयल के समान महर्षि वाल्मीकि को मैं प्रणाम करता हूँ।
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम् । लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥ ३५ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):सभी आपदाओं को दूर करने वाले, सभी प्रकार की सम्पत्ति देने वाले और सम्पूर्ण जगत को आनन्द प्रदान करने वाले श्रीराम को मैं बार-बार प्रणाम करता हूँ।
भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम् । तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ॥ ३६ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):“राम राम” नाम का उच्चारण संसार-बन्धन के बीजों को जला देता है, सुख-सम्पत्ति प्रदान करता है और यमदूतों को भी भयभीत करता है।
रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः । रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहं रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥ ३७ ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):राजाओं में रत्नस्वरूप श्रीराम सदा विजयी हों। मैं लक्ष्मीपति राम की भक्ति करता हूँ। राम ने राक्षसों की सेना का संहार किया; उन राम को प्रणाम है। राम से श्रेष्ठ कोई शरण नहीं है। मैं राम का दास हूँ। मेरा चित्त सदा राम में लीन रहे। हे राम, मेरा उद्धार करें।
रामरामेति रामेति रमे रामे मनोरमे । सहस्रनामतत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥ ३८ ॥ इति श्रीबुधकौशिकविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥ ॥ श्रीसीतारामचन्द्रार्पणमस्तु ॥
शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):“राम राम राम” नाम का स्मरण करने में मुझे आनन्द मिलता है। हे सुन्दरमुखि! श्रीराम का नाम हजारों दिव्य नामों के जप के समान फलदायक और महिमायुक्त है।
फलश्रुति एवं महात्म्य & पूजा विधि एवं शास्त्र सम्मत नियम
जो व्यक्ति नित्य इस रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करता है, वह दीर्घायु, सुखी, संततिवान, विजयी और समस्त संकटों व बाधाओं से मुक्त होकर भगवान श्री राम की कृपा का पात्र बनता है।
प्रातःकाल स्नान के उपरांत शुद्ध आसन पर बैठकर श्री सीता-राम व हनुमान जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पाठ करें।