सनातन वैदिक एवं भक्ति पुस्तकालय
स्तोत्र🐘भगवान गणेश3 मिनट

श्री संकटनाशन गणेश स्तोत्रम्

देवर्षि नारद द्वारा रचित श्री गणेश जी के बारह दिव्य नामों का संकटमोचन स्तोत्र।

मूल शास्त्र संदर्भ: नारद पुराण
पारंपरिक रचयिता: देवर्षि नारद
लिपि (Script):
अर्थ भाषा (Meaning):
1shloka

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्। भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुष्कामार्थसिद्धये॥१॥

शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):माता पार्वती के पुत्र भगवान श्री विनायक को मस्तक झुकाकर प्रणाम करते हुए, दीर्घायु, अर्थ और सभी मनोकामनाओं की सिद्धि के लिए भक्तों के हृदय में निवास करने वाले गणेश जी का नित्य स्मरण करें।

2shloka

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्। तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्॥२॥

शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):पहला नाम वक्रतुंड (घुमावदार सूंड वाले), दूसरा नाम एकदंत (एक दांत वाले), तीसरा नाम कृष्णपिंगाक्ष (काली और पीली आंखों वाले) और चौथा नाम गजवक्त्र (हाथी के मुख वाले) है।

3shloka

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च। सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम्॥३॥

शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):पांचवां नाम लंबोदर (विशाल उदर वाले), छठा विकट (अत्यंत विशाल), सातवां विघ्नराजेन्द्र (विघ्नों के नियंत्रक) और आठवां नाम धूम्रवर्ण (धुएं के समान रंग वाले) है।

4shloka

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्। एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्॥४॥

शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):नौवां नाम भालचंद्र (मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले), दसवां विनायक, ग्यारहवां गणपति और बारहवां नाम गजानन है। इन बारह नामों का जो नित्य तीनों कालों में पाठ करता है, उसे किसी भी कार्य में विघ्न नहीं होता।

5shloka

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेन्नर: । न च विघ्नभयं तस्य सर्वासिद्धिकरं प्रभो ॥५॥

शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):हे प्रभो! जो मनुष्य प्रतिदिन तीनों संध्याओं में भगवान गणेश के इन बारह नामों का श्रद्धापूर्वक पाठ करता है, उसे किसी भी प्रकार के विघ्न का भय नहीं रहता। इन पवित्र नामों का स्मरण भक्त को सभी कार्यों में सिद्धि और सफलता प्रदान करता है।

6shloka

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् । पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥६॥

शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):जो विद्यार्थी विद्या की इच्छा रखता है, उसे विद्या प्राप्त होती है; जो धन की इच्छा रखता है, उसे धन-समृद्धि प्राप्त होती है। जो संतान की इच्छा रखता है, उसे संतान प्राप्त होती है और जो मोक्ष की इच्छा रखता है, उसे परम गति एवं मोक्ष का मार्ग प्राप्त होता है।

7shloka

जपेद्वगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् । संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ॥७॥

शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):जो व्यक्ति इस गणपति स्तोत्र का नियमित रूप से श्रद्धापूर्वक जप करता है, उसे छह महीनों में इसका फल प्राप्त होता है। एक वर्ष तक निरन्तर इसका जप करने से सिद्धि प्राप्त होती है। इसमें कोई संदेह नहीं है।

8shloka

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां य: समर्पयेत । तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ॥८॥ ॥ इति श्रीनारदपुराणे संकष्टनाशनं गणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम्‌ ॥

शब्दार्थ (अर्थ) (Hindi):जो व्यक्ति इस पवित्र गणपति स्तोत्र को लिखकर आठ ब्राह्मणों को समर्पित करता है, उसे भगवान गणेश की कृपा से समस्त विद्याओं और ज्ञान की प्राप्ति होती है।

फलश्रुति एवं महात्म्य & पूजा विधि एवं शास्त्र सम्मत नियम

फलश्रुति एवं महात्म्य (Hindi):

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्। पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम्॥ इस स्तोत्र के नित्य तीनों कालों में पाठ करने से छह मास में सिद्धि और सभी संकटों का नाश होता है।

पूजा विधि एवं शास्त्र सम्मत नियम (Hindi):

प्रतिदिन प्रातः अथवा बुधवार एवं संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित कर दीपक जलाकर पाठ करें।

संबंधित पावन स्तोत्र व मंत्र